प्रशंसा किसी को जीवन दे सकती है, और बुराई किसी का जीवन बर्बाद भी कर सकती है
प्रशंसा की ताकत इतनी गहरी होती है कि अच्छे शब्द किसी को जीवन दे सकते हैं और गलत शब्द किसी की पूरी जिंदगी कमजोर कर सकते हैं।
हम सभी जानते हैं कि शब्दों में बहुत ताकत होती है। एक अच्छी बात किसी की जिंदगी बदल सकती है, जबकि एक बुरा कमेंट किसी के आत्मविश्वास को पूरी तरह तोड़ सकता है। इसलिए ज़रूरी है कि हम समझें कि प्रशंसा और आलोचना का असर किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व, भविष्य और मानसिकता पर कितना गहरा पड़ता है।
प्रशंसा क्यों ज़रूरी है? बच्चों के विकास में प्रशंसा की ताकत
जब किसी इंसान को उसके छोटे–छोटे प्रयासों के लिए भी सराहा जाता है, तो उसके भीतर एक सकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है।
खासकर बच्चे…
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जब किसी बच्चे के छोटे–छोटे कामों की तारीफ की जाती है,
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जब उसे उसके प्रयासों के लिए सराहा जाता है,
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जब उसके सामने “तुम कर सकते हो” कहा जाता है,
- प्रशंसा की ताकत बच्चे को आत्मविश्वासी बनाती है…
तो वह अपने आप पर विश्वास करना शुरू कर देता है।
धीरे–धीरे यही बच्चे…
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बेहतर काम करने लगते हैं,
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सीखने लगते हैं,
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अपने अंदर सुधार करते हैं,
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और बड़े होकर सफल व्यक्तित्व बन जाते हैं।

इस सबके पीछे सिर्फ एक चीज़ काम करती है—
छोटी-छोटी सफलताओं पर मिली सच्ची प्रशंसा।हमें समझना चाहिए कि प्रशंसा की ताकत क्यों ज़रूरी है…
बुराई और नकारात्मक कमेंट कितना नुकसान कर सकते हैं
जैसे प्रशंसा किसी का जीवन बना सकती है,
वैसे ही गलत शब्द किसी की जिंदगी बर्बाद भी कर सकते हैं। नकारात्मक शब्द प्रशंसा की ताकत को खत्म कर देते हैं…
आज भी बहुत से लोग छोटे बच्चों की छोटी–छोटी गलतियों पर कह देते हैं:
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“कितना नासमझ है!”
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“तुम कुछ नहीं कर सकते!”
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“तुम्हारा कुछ नहीं होगा!”
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“तुम हमेशा गलती करते हो!”
ये शब्द भले ही साधारण लगें,
लेकिन एक बच्चे के मन पर गहरा असर छोड़ते हैं।
धीरे–धीरे बच्चा खुद को वैसे ही मानने लगता है जैसा उसे कहा जाता है।
वह बेहतर बनने की कोशिश करने के बजाय,
अपनी गलत आदतों को ही सही मान लेता है।
यही नकारात्मक बातें आगे चलकर उसके:
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आत्मविश्वास को खत्म कर देती हैं
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व्यक्तित्व को कमजोर कर देती हैं
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और कई बार उसकी पूरी जिंदगी खराब कर देती हैं
पालतों और अभिभावकों की सबसे बड़ी भूमिका
हर माता–पिता अपने बच्चे का भला चाहता है,
लेकिन जाने–अनजाने में कई बार वे बच्चों को डांटकर,
उन्हें बुरा कहकर,
या लगातार कमेंट करके
उनके भीतर नकारात्मकता भर देते हैं।
कुछ माता–पिता छोटे प्रयासों की भी खूब प्रशंसा करते हैं,
और इसी वजह से उनके बच्चे आत्मविश्वासी और समझदार बनते हैं।
वहीं कुछ माता–पिता लगातार नकारात्मक बातें बोलते रहते हैं,
जिसके कारण बच्चे अपना स्वभाव बदल देते हैं और गलत दिशा में बढ़ जाते हैं।
इसलिए ज़रूरी है कि हम सोचें:
हमारी बातों से सामने वाले का व्यक्तित्व बन रहा है या बिगड़ रहा है?
बच्चे की प्रशंसा कब करनी चाहिए? — सही समय सबसे ज़रूरी
बच्चों की प्रशंसा तभी असर करती है, जब वह सही समय पर की जाए। कई बार माता-पिता बच्चे की मेहनत को देखकर तो खुश होते हैं, लेकिन उसे जताते नहीं। जबकि बच्चों के लिए हर छोटा कदम भी एक उपलब्धि होता है।
जब बच्चा कोई नया काम सीखता है, जैसे जूते बांधना, साफ-सफाई करना या होमवर्क सही करना—इन सब मौकों पर प्रशंसा ज़रूरी है। इससे उसे लगता है कि उसकी कोशिशें मायने रखती हैं।
सिर्फ रिज़ल्ट आने पर नहीं, बल्कि effort पर भी तारीफ़ करनी चाहिए। जब बच्चे को यह समझ आता है कि मेहनत को सराहना मिलती है, तो वह भविष्य में भी नए काम करने से नहीं डरता।
निष्कर्ष: छोटी प्रशंसा किसी की बड़ी सफलता का कारण बन सकती है
अब जब आपने यह पूरा लेख पढ़ लिया है,
तो आप खुद समझ गए होंगे कि—
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प्रशंसा जीवन बनाती है,
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और बुराई जीवन बिगाड़ती है।
इसलिए आज से ही अपने बच्चों, परिवार, दोस्तों और आसपास के लोगों में
छोटे–छोटे अच्छे कार्यों की प्रशंसा करें।
आपका एक सकारात्मक शब्द
किसी को नई दिशा दे सकता है,
नई उम्मीद दे सकता है,
और शायद उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा कारण भी बन सकता है।
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