सुनने की कला: 5 खतरनाक गलतियाँ जो आपकी बातचीत को बर्बाद कर देती हैं

सुनने की बजाय सुनाने की लालसा – एक आम लेकिन खतरनाक आदत

सुनने की कला हमारे आसपास तेजी से खत्म होती जा रही है, क्योंकि आज ज़्यादातर लोग बातचीत में सुनने की बजाय सिर्फ सुनाने पर ध्यान देते हैं। जो बातचीत में अपना दृष्टिकोण बताने के लिए इतने बेचैन रहते हैं कि सामने वाले को सुनने का मौका ही नहीं देते। मैं जहाँ ऑफिस में रहता हूँ, वहाँ एक सहकर्मी जोशी जी हैं। उम्र में बड़े हैं, सब उनकी इज्जत करते हैं, लेकिन जैसे ही ऑफिस में किसी टॉपिक पर चर्चा होती है—
एक ही व्यक्ति सबसे ज्यादा बोलते हैं: जोशी जी।

सुनने की कला का अभाव – दो लोग चर्चा में एक दूसरे को सुने बिना बोलते हुए

चाहे दो लोग किसी विषय पर धीरे-धीरे चर्चा कर रहे हों, अगर जोशी जी वहाँ से गुजर जाएँ, तो तय है कि वह बीच में बात काटकर अपना पॉइंट ऑफ व्यू बताना शुरू कर देंगे। और अगर कोई बीच में अपनी बात रखना चाहे, तो तुरंत कह देंगे –
“पहले मेरी बात सुनो…”
फिर वही कहानी दोबारा शुरू।


सुनने के बजाय सुनाने की आदत – हर तीसरे व्यक्ति में पाई जाती है

अगर ध्यान से देखें तो आपको हर तीसरा व्यक्ति ऐसा ही मिलेगा।
सामने वाला बोल रहा है, लेकिन ज्यादातर लोग उसकी बात समझने के लिए नहीं सुनते—
बल्कि अपनी बात कहने के इंतजार में सुनते हैं।

इस वजह से दो बड़ी समस्याएँ होती हैं:

  • लोग सामने वाले के भाव, विचार या असली पॉइंट को समझ ही नहीं पाते।

  • बातचीत सकारात्मक न होकर तनाव, बहस और गलतफ़हमी में बदल जाती है।

अधिकतर लोग मान लेते हैं कि सामने वाला ही मूर्ख है या समझ नहीं पा रहा, जबकि असल में समस्या सुनने की कमी है, समझ की नहीं।


क्यों बातचीत बहस में बदल जाती है?

किसी भी बातचीत का मकसद दो-तरफ़ा संवाद होता है, लेकिन जब दोनों पक्ष सिर्फ अपनी बात साबित करने में लगे रहते हैं, तो:

  • बातचीत चर्चा नहीं रहती

  • वह एक ‘बहस’ बन जाती है

  • और दोनों को लगता है कि सामने वाला गलत है

इस तरह की बातचीत में कोई भी एक-दूसरे को प्रभावित नहीं कर पाता, बल्कि अपनी छवि खराब कर लेता है।


डेल कार्नेगी का सबसे बड़ा सबक – ‘सुनना सीखिए’ (सुनने की कला)

कन्वर्सेशन और रिलेशनशिप पर लिखी गई दुनिया की सबसे प्रसिद्ध किताब
How to Win Friends and Influence People
में डेल कार्नेगी एक ही बात पर सबसे अधिक ज़ोर देते हैं:

“Influence का पहला नियम है – सुनना सीखो।”

अगर आप चाहते हैं कि:

  • लोग आपको पसंद करें

  • आपकी बात मानें

  • आपकी इज़्ज़त करें

  • और आपकी बातें प्रभाव डालें

तो सबसे पहले आपको सामने वाले को ध्यान से सुनने की कला सीखनी होगी। डेल कार्नेगी अपनी किताब How to Win Friends and Influence Peopleमें बताते हैं की अच्छा वक्ता बनने का सबसे आसान तरीका क्या है जो की अच्छा बोलना नहीं है बल्कि बल्कि सामने वाले की बात को अच्छी तरह सुनना और समझना है, वह अपनी जिंदगी का प्रैक्टिकल उदाहरण भी बताया था जिसमे एक व्यक्ति ने उसे बहुत अच्छा वक्ता बताया जबकि वह बोला नहीं था जबकि सामने वाले की बात को सिर्फ सुना था।

यह कला बहुत कम लोगों में होती है, लेकिन यही लोग हमेशा अधिक पसंद किए जाते हैं।अगर आप चाहते हैं की आपकी बातचीत (चर्चा) बेहतर हो अपने बात समझाने के बजाय सिर्फ सामने वाले समझने की कोशिश करें।


जब भी कोई बातचीत हो – यह ऑब्ज़र्व करें

अगली बार जब किसी डिस्कशन में हों, तो तीन बातों पर ध्यान दें:

  • कौन सुन रहा है

  • कौन सिर्फ सुनाने के लिए इंतजार कर रहा है

  • और कौन वास्तव में समझकर जवाब दे रहा है

आप तुरंत समझ जाएंगे कि असली प्रभाव किसका पड़ रहा है—
हमेशा उस व्यक्ति का… जो ज्यादा बोलता नहीं, बल्कि ज्यादा सुनता है।


निष्कर्ष

सुनना एक कला है।
सुनने की कला आपकी पर्सनालिटी को सुधारता है, रिश्तों में विश्वास बढ़ाता है और बातचीत को बहस से बचाता है।
यदि आप बेहतर कम्युनिकेशन स्किल विकसित करना चाहते हैं, तो आज से ही शुरुआत करें।

सुनना प्रभावशाली व्यक्तित्व में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कला है। सुनने की कला न सिर्फ सामने वाले की मनः स्थिति को समझने में मदद करती है किन्तु यह सुनाने वाले व्यक्ति के मन में भी हमारे प्रति आदर का भाव पैदा करती है जो सिर्फ उनकी बात सुनने के कारण पैदा होती है, अगर इसके बजाय हम उनकी बातों को सुने बिना या उनकी बात को काटकर अपना पक्ष रखना चाहे तो उन्हें हमारी बात समझ आये या न आये हमें उनकी बात समझ में नहीं आएगी और न ही यहाँ कोई प्रभावशाली चर्चा बन पायेगी।

 

सुनने की कोशिश बढ़ाइए, आप खुद अपनी इमेज में फर्क देखेंगे।

 

 

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